अध्याय 1: रहस्यमयी हवेली की दास्तान
वह बरसात की रात थी, जब रोहित, समीर, निशा और कविता अपने कॉलेज ट्रिप से लौट रहे थे। रास्ते में उनकी गाड़ी खराब हो गई। आसपास कोई मदद नहीं थी, मोबाइल का नेटवर्क भी नहीं आ रहा था। दूर घने पेड़ों के पीछे एक पुरानी हवेली दिख रही थी।
"रात यहीं गुजार लेते हैं, सुबह मैकेनिक ढूंढेंगे," रोहित ने सुझाव दिया।
"क्या तुम पागल हो? यह हवेली देखने में ही डरावनी लग रही है!" कविता ने घबराते हुए कहा।
"डरपोक मत बनो, यह सिर्फ एक पुरानी इमारत है!" समीर हंसते हुए बोला।
बड़ी मुश्किल से सबको मनाकर, वे हवेली की ओर बढ़े। लेकिन जैसे ही उन्होंने दरवाज़ा खोला, एक अजीब सी ठंडी हवा उनके शरीर से टकराई। हवेली के अंदर घना अंधेरा था, दीवारों पर पुरानी पेंटिंग्स और जाले लगे थे। सबने टॉर्च जलाकर चारों ओर देखा।
अध्याय 2: अजीब घटनाओं की शुरुआत
हवेली में घुसते ही उन्हें अजीब-अजीब आवाज़ें सुनाई देने लगीं – मानो कोई धीमे-धीमे फुसफुसा रहा हो। रोहित ने सोचा कि यह उसका वहम है, लेकिन निशा ने भी वही महसूस किया।
"मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा… हम यहाँ नहीं रुक सकते!" निशा ने डरते हुए कहा।
"अरे, घबराओ मत। यह सिर्फ हवा की आवाज़ है," समीर ने मज़ाक उड़ाया।
वे एक बड़े हॉल में पहुंचे, जहाँ पुराना फर्नीचर पड़ा था। अचानक एक खिड़की अपने-आप ज़ोर से बंद हो गई। हवा में ठंडक बढ़ गई थी, मानो कोई अदृश्य शक्ति उनके आसपास थी। कविता ने घबराकर रोहित का हाथ पकड़ लिया।
"यह जगह… सही नहीं है," उसने कांपते हुए कहा।
अध्याय 3: परछाइयों का नाच
रात का एक बज चुका था। सबको भूख लगी थी, इसलिए वे अपने बैग से चिप्स और बिस्किट निकालकर खाने लगे। तभी समीर ने मज़ाक में कहा, "क्यों न हम एक डरावनी कहानी सुनाएँ?"
"चुप रहो समीर! पहले से ही माहौल डरावना है," कविता ने उसे डांटा।
उसी वक्त, एक दरवाज़ा अपने आप चरमराने लगा। सबकी नज़रें उसी ओर मुड़ गईं। रोहित धीरे-धीरे आगे बढ़ा और दरवाज़ा खोला। अंदर कुछ नहीं था – सिर्फ अंधेरा। लेकिन तभी…
निशा ने चीख मार दी!
"वहां… वहां… कोई खड़ा था!" उसकी आँखें डर से चौड़ी हो गईं।
सबने जल्दी से टॉर्च जलाई, लेकिन वहां कोई नहीं था। समीर ने मज़ाक में कहा, "तुम्हारी आँखें धोखा खा रही हैं।" लेकिन उसकी आवाज़ में भी हल्का डर था।
अध्याय 4: भूतिया आईना
हवेली के एक कमरे में एक पुराना आईना लगा था। निशा ने उस पर धूल साफ की और जैसे ही उसने उसमें देखा, उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
आईने में चारों दोस्त तो दिख रहे थे, लेकिन उनके पीछे एक और परछाईं थी – एक औरत, सफेद साड़ी में, बिखरे बालों के साथ!
निशा ने घबराकर पीछे देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था।
"रोहित… यहाँ कुछ गड़बड़ है," उसने कांपते हुए कहा।
"यह सिर्फ तुम्हारा वहम है," समीर ने फिर हंसते हुए कहा। लेकिन तभी आईने में वह परछाईं हिलने लगी… और एक खौफनाक आवाज़ गूंज उठी – "चले जाओ यहाँ से!"
आईना अचानक ज़ोर से टूट गया और कांच के टुकड़े हवा में उड़ने लगे। सबने चीखते हुए दौड़ लगाई और हॉल में वापस आ गए।
अध्याय 5: हवेली का भयानक सच
कविता रो रही थी, निशा कांप रही थी, समीर की बोलती बंद थी और रोहित सोच में डूबा था। आखिर यह सब क्या था?
तभी उन्हें दीवार पर एक पुरानी किताब मिली। उसमें लिखा था:
"यह हवेली श्रापित है। सौ साल पहले यहाँ एक औरत को उसके पति ने जिंदा जला दिया था। उसकी आत्मा अब भी यहाँ भटकती है। जो भी यहाँ आता है, वह कभी ज़िंदा नहीं लौटता…"
"हमें तुरंत यहाँ से निकलना होगा!" रोहित चिल्लाया।
लेकिन जैसे ही वे दरवाज़े की ओर भागे, दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। हवेली के अंदर एक कर्कश हंसी गूंजने लगी।
"अब तुम नहीं बच सकते!" एक भयानक आवाज़ आई।
चारों दोस्त दीवार से चिपक गए। अचानक, सफेद साड़ी में लिपटी वह डरावनी आत्मा सामने आ गई – जले हुए चेहरे के साथ, खाली आँखों से उन्हें घूरते हुए!
अध्याय 6: मौत या मुक्ति?
सबने अपनी जान बचाने के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन आत्मा ने समीर को पकड़ लिया।
"मुझे छोड़ दो!" समीर चीख पड़ा।
रोहित ने हिम्मत दिखाकर पास पड़ी लोहे की रॉड उठाई और आत्मा की ओर फेंकी। अचानक आत्मा ज़ोर से चिल्लाई और कमरे की सारी चीज़ें हिलने लगीं।
"यह आग से जली थी… आग ही इसे खत्म कर सकती है!" निशा ने चिल्लाया।
रोहित ने जल्दी से अपना लाइटर निकाला और पास पड़े लकड़ी के टुकड़े को जलाया। जैसे ही जलता हुआ टुकड़ा आत्मा के पास गया, हवेली कांपने लगी। भूत ने एक तेज़ चीख मारी और देखते ही देखते जलकर राख बन गई।
दरवाज़ा अपने आप खुल गया। चारों दोस्त भागते हुए हवेली से बाहर निकले।
सुबह की पहली किरणें हवेली पर पड़ीं, और वह जगह पूरी तरह शांत हो गई।
सीख: डर से भागो मत, उसका सामना करो!
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि डर से भागने से कुछ नहीं होता। हिम्मत और समझदारी से हर मुसीबत का हल निकाला जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है?
नहीं, यह पूरी तरह से एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन इसे इतनी सजीवता से लिखा गया है कि यह असली लगती है।
2. क्या वाकई आत्माएँ होती हैं?
यह एक बहस का विषय है। कुछ लोग मानते हैं कि आत्माएँ होती हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ मन का भ्रम मानते हैं।
3. डरावनी जगहों पर जाने से बचना चाहिए?
अगर कोई जगह रहस्यमयी या भूतिया मानी जाती है, तो वहाँ जाने से पहले सोच-समझ लेना चाहिए। कभी-कभी हमारे मन का डर ही सबसे बड़ा होता है।
4. क्या भूतों से बचने का कोई तरीका है?
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, सकारात्मक ऊर्जा, मंत्र, और हिम्मत से नकारात्मक शक्तियों को दूर किया जा सकता है।
5. क्या यह कहानी फिल्मों जैसी लगती है?
हाँ, यह कहानी एक हॉरर फिल्म की तरह रोमांचक और डरावनी है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पाठक को कहानी के साथ जोड़े रखती है।
निष्कर्ष
तो दोस्तों, अगर कभी आप किसी वीरान जगह जाएं, तो सावधान रहें! कौन जानता है, कोई परछाईं आपके पीछे खड़ी हो…!