तू ही मेरा इश्क़: एक अधूरी मोहब्बत की अनसुनी दास्तान

जब इश्क़ मुकम्मल नहीं हो पाता इश्क़ का रंग बड़ा अजीब होता है। कभी यह गुलाबी खुशबू बनकर जिंदगी को महका देता है, तो कभी एक बेमिसाल दर्द बनकर दिल में बस जाता है। 

तू ही मेरा इश्क़: एक अधूरी मोहब्बत की अनसुनी दास्तान

यह कहानी है अभय और सृष्टि की, जिनका प्यार वक्त के मोड़ पर ठहर गया, लेकिन फिर भी वह कभी खत्म नहीं हुआ।

अध्याय 1: पहली नज़र का जादू


दिल्ली की भीड़भाड़ भरी सड़कों पर कॉलेज जाने वाले छात्रों की भीड़ में अभय ने पहली बार सृष्टि को देखा था। वह नीले सूट में, खुले बालों के साथ किसी परी से कम नहीं लग रही थी। उसकी हंसी में एक अजीब-सी मासूमियत थी, जो सीधा दिल में उतर जाती थी।

अभय ने अपने दोस्तों से पूछा,
"ये लड़की कौन है?"

दोस्तों ने मुस्कराते हुए कहा,
"सृष्टि, कॉलेज की सबसे होशियार लड़की, लेकिन तुझे कोई चांस नहीं है!"

पर इश्क़ में कौन हार मानता है? अभय ने ठान लिया कि उसे सृष्टि से दोस्ती करनी ही है।


अध्याय 2: दोस्ती या इश्क़?


अभय ने धीरे-धीरे सृष्टि से दोस्ती कर ली। दोनों की बातचीत क्लास की नोट्स से शुरू हुई और फिर चाय के प्यालों तक जा पहुंची। अभय का बेबाक अंदाज और सृष्टि की समझदारी उन्हें एक-दूसरे के और करीब ले आई।


तू ही मेरा इश्क़: एक अधूरी मोहब्बत की अनसुनी दास्तान

एक दिन, बारिश हो रही थी। सृष्टि ने छतरी खोल रखी थी, जबकि अभय भीग रहा था।

सृष्टि हंसते हुए बोली,
"अभय, तुझे बारिश से कोई परहेज़ नहीं?"

अभय ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"बारिश से नहीं, पर तुझसे दूर रहने से डर लगता है।"

सृष्टि उसकी बात सुनकर थोड़ी देर खामोश रही, लेकिन फिर उसने बात बदल दी। अभय समझ गया कि सृष्टि अभी तक प्यार को लेकर गंभीर नहीं थी।


अध्याय 3: इकरार का पल


कॉलेज के आखिरी साल में एक दिन अभय ने सृष्टि को बुलाया और कहा,
"सृष्टि, मुझे नहीं पता कि तुझे मेरे बारे में कैसा लगता है, लेकिन मैं तुझसे बेइंतहा मोहब्बत करता हूं।"

सृष्टि थोड़ी देर चुप रही और फिर कहा,
"अभय, तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, पर मुझे डर लगता है... अगर कभी कुछ गलत हुआ तो?"

अभय ने उसकी आँखों में देखा और कहा,
"अगर हम डरते रहेंगे, तो कभी जी नहीं पाएंगे।"

सृष्टि की आँखें नम हो गईं, पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।


अध्याय 4: दूरियों का दर्द


कॉलेज खत्म होते ही सृष्टि की शादी की बात घरवालों ने तय कर दी। अभय के पास अब कोई रास्ता नहीं था। वह जानता था कि अगर उसने जबरदस्ती की, तो सृष्टि मुश्किल में पड़ जाएगी।

तू ही मेरा इश्क़: एक अधूरी मोहब्बत की अनसुनी दास्तान

शादी वाले दिन, अभय बहुत दूर से उसे देख रहा था। उसकी आँखों में आँसू थे, पर वह मुस्कुरा रहा था।

सृष्टि ने एक आखिरी बार उसे देखा, और उसकी आँखों में भी वही सवाल था – क्या होता अगर हम साथ होते?


अध्याय 5: इश्क़ कभी खत्म नहीं होता


सालों बाद, अभय एक कॉफी शॉप में बैठा था, जब अचानक किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह मुड़ा और देखा सृष्टि!

वह अब भी वैसी ही थी, बस उसकी आँखों में एक अधूरी मोहब्बत की कहानी थी।

"कैसे हो?"  सृष्टि ने पूछा।

अभय मुस्कुराया और कहा,
"आज भी वहीं हूं, जहाँ तू मुझे छोड़कर गई थी।"

दोनों खामोश थे, लेकिन उनकी खामोशी में हजारों बातें थीं।

इश्क़ मुकम्मल नहीं हुआ था, लेकिन खत्म भी नहीं हुआ था...


तू ही मेरा इश्क़: एक अधूरी मोहब्बत की अनसुनी दास्तान


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)


1. क्या अभय और सृष्टि का प्यार सच्चा था?

हाँ, उनका प्यार सच्चा था, लेकिन हालातों ने उन्हें अलग कर दिया।

2. क्या इश्क़ का हर सफर मुकम्मल होना जरूरी है?

नहीं, कुछ इश्क़ अधूरे रहकर भी पूरे होते हैं, जैसे अभय और सृष्टि का।

3. क्या सृष्टि भी अभय से प्यार करती थी?

हाँ, लेकिन उसने अपने परिवार और समाज के डर से कभी खुलकर इज़हार नहीं किया।

4. यह कहानी क्या सिखाती है?

यह कहानी सिखाती है कि इश्क़ में कभी कभी दूरी भी प्यार की गहराई को और बढ़ा देती है।


निष्कर्ष


"प्यार कभी खत्म नहीं होता, वह बस वक्त के साथ एक नए रूप में ढल जाता है।" अभय और सृष्टि की कहानी हमें यही सिखाती है – सच्चा इश्क़ कभी नहीं मरता।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!