ऐसा एहसास - अनकही मोहब्बत

अपने किसी से कभी प्यार किया है, कमेंट मे जरूर बताना, प्यार... एक ऐसा एहसास जो शब्दों से ज्यादा आँखों में नजर आता है, जो लफ्जों से ज्यादा खामोशियों में महसूस किया जाता है। 

ऐसा एहसास - अनकही मोहब्बत

लेकिन क्या हो जब यह प्यार जुबां तक आने से पहले ही एक अधूरी कहानी बन जाए? यह कहानी है आरव और सिया की, जिनकी मोहब्बत उनके दिलों में तो रही, लेकिन तकदीर ने कभी उसे जुबां तक आने नहीं दिया।

पहली मुलाकात वो खास लम्हा


कॉलेज का पहला दिन था। नई दोस्तियाँ बन रही थीं, नई कहानियाँ लिखी जा रही थीं। आरव एक सीधा-सादा लड़का था, जिसकी दुनिया किताबों में ही सिमटी हुई थी। वहीं, सिया एक खुशमिजाज लड़की थी, जिसे हंसना और दूसरों को हंसाना पसंद था।

पहली बार जब आरव ने उसे देखा, तो जैसे दुनिया थम-सी गई। वो अपनी किताबों में उलझा था, लेकिन सिया की खिलखिलाती हँसी ने उसे खींच लिया। पहली नजर में ही आरव को महसूस हुआ कि यह लड़की उसकी ज़िंदगी में कोई खास जगह बनाने वाली है।


दोस्ती या कुछ और?


समय बीतता गया, और आरव और सिया की दोस्ती गहरी होती गई। वे हर समय साथ रहते, साथ पढ़ते, साथ हंसते। लेकिन आरव के दिल में जो हलचल मची थी, उसे सिया कभी समझ नहीं पाई।


ऐसा एहसास - अनकही मोहब्बत

हर बार जब सिया किसी और का नाम लेकर हंसती, तो आरव का दिल अंदर ही अंदर टूट जाता। लेकिन वह खामोश था, क्योंकि उसे डर था कि अगर उसने अपने जज्बात बयां कर दिए, तो उसकी दोस्ती भी खो जाएगी।


मोहब्बत का इम्तिहान


कॉलेज के आखिरी साल में सिया को किसी और से प्यार हो गया आदित्य से। वह एक हैंडसम और चार्मिंग लड़का था, जिसकी हर लड़की दीवानी थी। जब सिया ने आरव को बताया कि उसे आदित्य पसंद है, तो आरव के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आई, लेकिन उसका दिल हजार टुकड़ों में बंट चुका था।

उसने अपनी मोहब्बत को एक तरफ रखकर सिया की खुशी को अपनी खुशी बना लिया। वह जानता था कि सिया की खुशी आदित्य में थी, और इसलिए उसने खुद को साइड कर लिया।


एक अधूरा ख़त


कॉलेज खत्म हुआ, और सब अपनी-अपनी राह चल पड़े। सिया आदित्य के साथ चली गई, और आरव अपनी दुनिया में वापस लौट गया। लेकिन जाने से पहले, उसने सिया के लिए एक ख़त लिखा, जिसमें उसने अपनी पूरी मोहब्बत को बयां किया।


ऐसा एहसास - अनकही मोहब्बत


"सिया,
तुम्हारी हँसी मेरी दुनिया थी, और तुम्हारी बातें मेरे लिए संगीत। मैंने तुमसे कभी कुछ नहीं मांगा, सिर्फ तुम्हारी खुशी चाहता था। शायद यही मेरी मोहब्बत की सबसे खूबसूरत बात थी कि मैंने तुमसे कभी यह नहीं कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"

लेकिन यह ख़त कभी सिया तक नहीं पहुंचा। वह बस एक किताब के पन्नों में दबकर रह गया।


बरसों बाद...


समय बीतता गया। आरव एक सफल लेखक बन गया, लेकिन उसकी कहानियों में हमेशा एक अधूरी मोहब्बत की छाप होती थी।

एक दिन, एक बुकस्टोर में उसकी मुलाकात सिया से हुई। वह अब पहले जैसी नहीं थी उसकी आँखों में एक खोई हुई उदासी थी। उसने बताया कि आदित्य ने उसे धोखा दिया, और वह अब अकेली थी।


आरव ने मुस्कुराकर कहा, "कुछ कहानियाँ मुकम्मल नहीं होतीं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वो खूबसूरत नहीं होतीं।"


उस दिन सिया को पहली बार अहसास हुआ कि उसकी ज़िंदगी में आरव की क्या जगह थी। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।


निष्कर्ष – एक अधूरी लेकिन अमर मोहब्बत


आरव और सिया की कहानी शायद पूरी नहीं हुई, लेकिन उनकी मोहब्बत कभी खत्म नहीं हुई। कुछ प्यार ऐसे ही होते हैं खामोश, मगर हमेशा ज़िंदा।


ऐसा एहसास - अनकही मोहब्बत

कभी-कभी प्यार का मतलब साथ रहना नहीं होता, बल्कि उस इंसान की खुशी में अपनी खुशी ढूंढ लेना होता। आरव ने यही किया था। उसने सिया से कभी कुछ नहीं माँगा, बस उसकी हँसी को अपनी ज़िंदगी बना लिया।

क्योंकि सच्चा प्यार मांगता नहीं, बस देता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)


1. क्या यह कहानी सच्ची है?

नहीं, यह एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन इसमें छिपी भावनाएँ हर किसी के दिल को छू सकती हैं।

2. क्या आरव को अपनी मोहब्बत कबूल कर लेनी चाहिए थी?

शायद हाँ, लेकिन कभी-कभी हम अपनों की खुशी के लिए खुद को पीछे रख देते हैं। यही प्यार की खूबसूरती है।

3. क्या सिया को आखिर में एहसास हुआ कि आरव उसे चाहता था?

हाँ, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। यह ज़िंदगी की कड़वी सच्चाई है कि हमें कुछ रिश्तों की कीमत तब समझ आती है जब वो दूर चले जाते हैं।

4. क्या अधूरी मोहब्बत भी खूबसूरत हो सकती है?

बिल्कुल! हर मोहब्बत को साथ रहना ज़रूरी नहीं होता, कुछ प्यार सिर्फ दिल में बसे रहकर ही अमर हो जाते हैं।


अंत में...


कहानी ख़त्म, मगर एहसास अब भी ज़िंदा। अगर आपके पास भी कोई अधूरी मोहब्बत की कहानी है, तो उसे दिल में कैद मत रखिए, उसे महसूस कीजिए।

क्योंकि मोहब्बत कभी अधूरी नहीं होती, बस कहानियाँ पूरी नहीं होतीं...

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