दोनों की मुलाकात बिल्कुल फ़िल्मी थी बस स्टॉप पर। बारिश हो रही थी, और आरव किताब लिए बैठा था। तभी एक तेज़ हवा चली, और उसकी किताब उड़कर अनन्या के पास चली गई। उसने किताब उठाई और मुस्कुराकर बोली,
"इश्क़ पर लिखी किताबें पढ़ने से अच्छा है, इसे महसूस करो।"
आरव उस वक्त कुछ न कह सका, लेकिन उसकी आंखें कुछ कह रही थीं।
2. जब दोस्ती बनी चाहत
मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता गया। अनन्या की बातों में एक जादू था, जिससे आरव बच नहीं सका। दोनों की दोस्ती गहरी होती चली गई।
आरव को अब समझ आ चुका था कि वो अनन्या को पसंद करने लगा है। मगर उसे डर था कि कहीं उसकी ये दोस्ती हमेशा के लिए ना टूट जाए।
एक शाम, झील के किनारे बैठे हुए अनन्या ने हंसते हुए कहा,
"अगर किसी को सच्चा प्यार हो जाए, तो उसे कब बताना चाहिए?"
आरव ने दिल की धड़कनों को काबू में रखते हुए कहा,
"जब यकीन हो कि वो प्यार भी तुम्हें उतना ही चाहता है।"
अनन्या चुप हो गई, और हवा में अजीब-सी ख़ामोशी घुल गई।
3. प्यार का इज़हार और दूरियाँ
आरव हिम्मत करके अनन्या को प्रपोज़ करने वाला था, मगर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
एक दिन अचानक, अनन्या के पिता का ट्रांसफर किसी और शहर में हो गया। उसके जाने की खबर सुनते ही आरव का दिल बैठ गया।
आखिरी मुलाकात में अनन्या ने कहा,
"कभी-कभी मोहब्बत इज़हार की मोहताज नहीं होती, आरव। कुछ एहसास दिल में ही रहने दो, बिना नाम, बिना पहचान के।"
और फिर वो चली गई, हमेशा के लिए।
4. इंतज़ार और यादों का सफर
आरव हर दिन उसी झील के किनारे बैठा रहता, जहाँ कभी दोनों साथ बैठते थे। वो जानता था कि शायद अनन्या लौटकर न आए, मगर दिल ने मानने से इनकार कर दिया।
समय बीतता गया, मगर आरव का प्यार नहीं बदला।
एक दिन, उसे एक चिट्ठी मिली। अनन्या की लिखावट थी
"क्या इश्क़ की कोई उम्र होती है? क्या मोहब्बत वक़्त से बंधी होती है? अगर हां, तो शायद मैंने तुम्हें वक़्त से पहले ही प्यार कर लिया था, और अब ये मोहब्बत कभी ख़त्म नहीं होगी।"
आरव की आंखों में आंसू थे, मगर होठों पर मुस्कान। प्यार का इज़हार कभी न हुआ, मगर मोहब्बत की गहराई कभी कम न हुई।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. क्या अधूरी मोहब्बत भी सच्ची होती है?
हाँ, प्यार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक एहसास है, जो दूर रहकर भी जिंदा रहता है।
2. क्या प्यार को इज़हार करना ज़रूरी है?
हर प्यार को शब्दों की ज़रूरत नहीं होती, कभी-कभी खामोशियां भी बहुत कुछ कह जाती हैं।
3. क्या समय के साथ सच्चा प्यार बदल जाता है?
नहीं, सच्चा प्यार कभी नहीं बदलता, बस उसकी शक्ल और अहसास बदल जाते हैं।
निष्कर्ष:
यह कहानी बताती है कि प्यार केवल पास रहने का नाम नहीं, बल्कि एक एहसास है जो दूरियों में भी जिंदा रहता है। आरव और अनन्या की कहानी अधूरी होते हुए भी मुकम्मल थी, क्योंकि उनकी मोहब्बत अमर थी।
"कभी-कभी अधूरी कहानियां ही सबसे ज्यादा खूबसूरत होती हैं।"